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समय खण्ड रहे है ये व्यवस्थायें व्यक्ति की आत्मा को कुचलने वाले रहे है चाहे आप रामराज कहें या कुछ और राजदण्ड राजतंत्र धर्मतन्त्र आदि जनविरोधी व्यवस्थाओं का प्रतीक है

त्मन्दिर में उसका होना लोकतंत्र के मार्ग में बाधा का प्रतीक है ये हमें असहनीय है  हमारी आत्मा पर अब हमारा निर्धारित राज व हमारा निर्धारित दण्ड ही चलेगाकिसी राजतंत्र का या किसी धर्म तंत्र का राजदण्ड सेंगोल नहीं आजादी के बाद से वर्तमान सरकार तक हमने जोभी सरकारें चुनी उन्हें हमने मात्र सर्विश प्रोवाइडर्स कि हैसियत दी हैं उससे अधिक नही आपने ये p11कैसे समझ लिए की आप देश को पुन धर्मतंत्र या राजतंत्र की भट्टी में झौक सकने में सक्षम है जी नहीं बिल्कुल नही आप भी हमारे सर्विश प्रोवाइडर ही है वर्तमान संविधान ने आपको ऐसा अधिकार नहीं दिया है यदि किसी कोर्ट ने कभी  संविधान कि किसी व्याख्या में आपको इतना सक्षम माना है तो मैं मनोहर पुत्र गोपीबाई अध्यक्ष गवेषणा इस व्यवस्था से सत्याग्रह करने वाला पहला व्यक्ति हूँ अपने ज्ञान व विश्वास से में ये भी जनता हूँ कि मेरे उद्द्गार किसीभी अर्थ में भारत देश राष्ट्र  या

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