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जांच में खानापूर्ति पर सामाजिक कार्यकर्ता इखलाख ने उप मुख्यमंत्री विधानसभा लखनऊ से की पुनः जांच की मांग, जांच अधिकारी की निष्पक्षता पर भी उठाए सवाल !

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 व उत्तर प्रदेश पंचायत राज जांच नियमावली 1997 के अधीन प्रेषित किए गए शिकायती पत्रों पर जांच अधिकारी द्वारा की गई खानापूर्ति पर सामाजिक कार्यकर्त्ता इखलाक ने ऐतराज जताते हुए उप मुख्यमंत्री विधानसभा लखनऊ से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जानकारी देते हुए समाजिक व आरटीआई कार्यकर्ता इखलाक ने बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1) (छ) के साथ पठित उत्तर प्रदेश पंचायत राज जांच नियमावली 1997 के अधीन ग्राम पंचायत नागल के विरुद्ध विभिन्न कार्यों में किए गए भ्रष्टाचार से संबंधित चार शिकायती पत्र (5 अगस्त 2019 से 20 अक्टूबर 2020 व 25 फरवरी 2020 से 30 जून 2020 तक) प्रेषित किए गए थे जिनकी जांच हेतु नियुक्त अधिकारी द्वारा प्रारंभिक जांच उपरांत की गई कार्यवाही से अवगत नही कराया गया है। तत्पश्चात शिकायतकर्ता को आरटीआई के माध्यम से पता चला कि प्रारंभिक जांच में शिकायती पत्र में दिए गए तथ्यों एवं साक्ष्यो का संज्ञान नहीं लिया गया है तथा जांच के नाम पर जांच अधिकारी द्वारा खानापूर्ति कर फाइल बंद कर दी गई है। शिकायतकर्ता ने रोशनी व्यवस्था में किए जा रहे घोटाले पर एक तथ्य देते हुए बताया कि जांच अधिकारी द्वारा लाइटो की संख्या पूरी करने की कोशिश की गई है जिससे संबंधित लोगो को बचाया जा सके जबकि स्ट्रीट लाइट कितने मूल्य में खरीदी है इस तथ्य को आख्या रिपोर्ट से ही गायब कर दिया है जिससे अधिकारियों में निष्पक्षता का भाव नगण्य प्रतीत होता है। शिकायतकर्ता ने उप मुख्यमंत्री विधानसभा लखनऊ को डाक के माध्यम से भेजे शिकायती पत्र पर संज्ञान लेकर पुनः जांच कराकर उचित करने की मांग की है।"

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