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अंक ज्योतिष क्या है ? जानिए अंकशास्त्री किरण अग्रवाल के साथ !

अंक ज्योतिष-


अंक ज्योतिष एक महत्वपूर्ण विद्या है, जिसके द्वारा अंकों के माध्यम से व्यक्ति के विषय एवं उसके भविष्य को जानने का प्रयास किया जाता है. अंक ज्योतिष में अंकों के माध्यम द्वारा गणित के नियमों का व्यवहारिक उपयोग करके मनुष्य के विभिन्न पक्षों, उसकी विचारधारा , जीवन के विषय इत्यादि का विशद विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है. अंक ज्योतिष को अंक विद्या या अंक शास्त्र और संख्या शास्त्र इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है. अंक शास्त्र में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल को आधार बनाकर उनकी विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है.


अंक ज्योतिष को अंग्रेजी में न्यूमरोलॉजी के नाम से पहचाना जाता है. यदि हम अंक ज्योतिष के इतिहास को जानने का प्रयास करें तो पाएंगे कि इसका इतिहास 10,000 पूर्व से भी पहले का रहा होगा मिस्र, बेबिलोन और ग्रीस में इनकी जडों का पनपना आरंभ हुआ तथा पाइथागोरस जी के कार्यों द्वारा इन्हें प्रमुखता प्राप्त हुई. कोई भी दिन अंकों के बिना नहीं बीतता है. मिस्र के महान गणित शास्त्र पायथागोरस ने अंकों की महत्ता के विषय में इस तथ्य का अनुमोदन किया कि “ Number rules the universe’’ अर्थात अंक ब्रह्मांड पर राज करते हैं.


अंक अर्थात् नंबर (Number) और इस शास्त्र को अंग्रेजी में Numerology कहते हैं. इस शास्त्र के समान ही मिलता जुलता दूसरा आंकड़ा शास्त्र (Statistics) भी है. जिसमें तथ्यों, घटनाओं, गुणधर्मों आदि अंकों की जानकारी एकत्र करके उसका वैज्ञानिक और गणित के रूप में उपयोग किया जाता है. परंतु यह अंकशास्त्र (Statistics) अपने अंकशास्त्र ज्योतिष से बिल्कुल अलग है.


अति प्राचीन समय में अंकशास्त्र या संख्याशास्त्र का ज्ञान हिन्दुओं, ग्रीकों, खाल्डीओं, हिब्रुओं, इजिप्ट वासियों और चीनियों को था. अपने देश के प्रश्न विचार, स्वरोदम शास्त्र आदि प्राचीन ग्रंथों में अंकशास्त्र का अच्छा उपयोग हुआ है. अंकशास्त्र की व्याख्या देना बहुत ही कठिन है. इसके विषय में वोल्टर बी ग्रिब्सन द्वारा दी गई व्याख्या याद रखने जैसी है. ‘गणित शास्त्र के मूलभूत सिद्धांतों का मनुष्य के भौतिक अस्तित्व (या भौतिकी उत्कर्ष) के लिए होने वाला व्यवहारिक उपयोग ही अंकशास्त्र है’.


अंकशास्त्र विद्वानों का मानना है कि अंकशास्त्र का प्रारंभ हिब्रू मूलाक्षरों से हुआ है. अंक ज्योतिष हिब्रू लोगों का विषय रहा है. इसके अनुसार इजिप्ट की जीप्सी जनजाति ने भी इस शास्त्र को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.


हिब्रू में ‘बाईस’ मूलाक्षर हैं और प्रत्येक अक्षर को क्रम अनुसार एक से बाईस अंक दिए गए हैं. हिब्रू लोग अक्षरों के स्थान पर अंक और अंकों के स्थान पर अक्षरों का उपयोग करते थे. अक्षरों और अंकों के अधिपतियों के रूप में अलग-अलग राशियों तथा ग्रहों को निश्चित किया गया था. अत: हिब्रू लोगों के समय से ही अक्षरों, अंकों, राशियों और ग्रहों के मध्य संबंध स्थापित हुआ मान सकते हैं और यह संबंध ही अंकशास्त्र के आधार रूप हैं.


अंक शास्त्र में प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक एक अंक निर्धारित किया गया है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है और यही नौ ग्रह मनुष्य के जीवन पर अपना प्रभाव डालते हैं. जन्म के समय ग्रहों की जो स्थिति होती है, उसी के अनुसार उस व्यक्ति का व्यक्तित्व निर्धारित हो जाता है. इसलिए, जन्म के पश्चात व्यक्ति पर उसी अंक का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, जो कि व्यक्ति का स्वामी होता है. यदि एक व्यक्ति का अंक किसी दूसरे व्यक्ति के अंक के साथ मेल खा रहा हो तो दोनों व्यक्तियों के मध्य एक अच्छा संबंध बनता है.


अंक ज्योतिष शास्त्र में क, ख, ग, घ के अक्षरों और अंकों पर विचार किया जाता है. व्यक्ति के नाम के अक्षर अंग्रेजी में लिखकर प्रत्येक अक्षर की अंक गणना करके नाम का नामांक प्राप्त किया जाता है. तथा जन्म तारीख, माह एवं वर्ष के अंकों का योग करके भाग्यांक प्राप्त किया जाता है तथा इसके द्वारा भविष्यवाणी की जाती है.


*वास्तु शास्त्र*

वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर किसी घर में वास्तु दोष पाया जाता है तो वहां पर तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन परेशानियों में घरेलू कलह, आर्थिक बदहाली, मानसिक तनाव और वाद-विवाद का साया बना रहता है। घर में वास्तु दोष होने पर वहां पर रहने वाले सभी सदस्यों की तरक्की रूक जाती है। वहीं दूसरी तरफ जिन घरों में वास्तु दोष नहीं होता है वहां पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है। घर में सकारात्मकता होने से घर में हमेशा सुख-सुविधा और संपन्नता बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं जिसका पालन करने पर घर पर खुशियां बरकरार रहती है। 


*चक्र हीलिंग* 

हमारे शरीर के अंदर जो सात चक्र  है

उनपर मंत्र जाप करने को चक्र हीलिंग कहते हैं .  हमारे शरीर में सात चक्र होते हैं, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्त्रार। नवरात्रि में हर दिन एक विशेष चक्र को जाग्रत किया जाता है, जिससे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। हम अगर इस ऊर्जा का ठीक प्रबंधन कर लें तो असाधारण सफलता भी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। सामान्यत: हमारी सारी ऊर्जा मूलाधार चक्र (कामेंद्रियों के ऊपर) होती है। योगीजन नवरात्रि में ध्यान के माध्यम से मूलाधार में स्थित अपनी ऊर्जा को सहस्त्रार तक लाते हैं। सांसों के नियंत्रण और ध्यान से इस ऊर्जा को ऊपर खींचा जा सकता है। जैसे-जैसे हम ऊर्जा को एक-एक चक्र से ऊपर उठाते जाते हैं, हमारे व्यक्तित्व में चमत्कारी परिवर्तन दिखने लगते हैं। 


*ध्यान* 


ध्यान से आपकी चेतना को लाभ मिलता है। ध्यान से आपके भीतर सामंजस्यता बढ़ती है। जब भी आप भावनात्मक रूप से अस्थिर और परेशान हो जाते हैं, तो ध्यान आपको भीतर से स्वच्छ, निर्मल और शांत करते हुए हिम्मत और हौसला बढ़ाता है। ध्यान से चिंता और समस्याएं छोटी हो जाती है।


*हिप्नोथैरेपी* 

ध्यान से आपकी चेतना को लाभ मिलता है। ध्यान से आपके भीतर सामंजस्यता बढ़ती है। जब भी आप भावनात्मक रूप से अस्थिर और परेशान हो जाते हैं, तो ध्यान आपको भीतर से स्वच्छ, निर्मल और शांत करते हुए हिम्मत और हौसला बढ़ाता है। ध्यान से चिंता और समस्याएं छोटी हो जाती है।


हाइपोथेरेपी  (Hypnotherapy) पसंद से एक उपचार है। जो लोग कुछ जीवन शैली के मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण बदलना चाहते हैं और धूम्रपान (smoking) जैसी आदतों से बाहर निकलना चाहते हैं, इस उपचार को चालू करें। चिंता और अवसाद (anxiety and depressi )

सम्मोहन से निम्नलिखित फायदे हो सकते हैं-



1. किसी भी शारीरिक रोग को कुछ हद तक ठीक किया जा सकता है।

2. किसी भी मानसिक रोग को बहुत हद तक ठीक किया जा सकता है।


3. इसके माध्यम से किसी भी प्रकार का डर या फोबिया दूर किया जा सकता है।

4. इससे व्यक्ति का विकास कर सफलता अर्जित की जा सकती है।


5. सम्मोहन से दूर बैठे किसी भी व्यक्ति की स्थिति जानी जा सकती है।6. इसके माध्यम से शरीर से बाहर निकलकर हवा में घूमा जा सकता है।

7. इसके माध्यम से भूत, भविष्य और वर्तमान की घटनाओं को जाना जा सकता है।

8. इससे अपने पिछले जन्म को जाना जा सकता है।

9. इसके माध्यम से किसी की भी जान बचाई जा सकती है।

10. इसके माध्यम से लोगों का दु:ख-दर्द दूर किया जा सकता है।

11. इसके माध्यम से खुद की बुरी आदतों से छुटकारा पाया जा सकता है।12. इसके माध्यम से भरपूर आत्मविश्वास और निडरता हासिल की जा सकती है।



किरण अग्रवाल 

8085633908

Spiritual Hillier

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