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सूचना मांगी तो मिली मारने की धमकी शिकायत दर्ज नागल सहारनपुर सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी मांगने पर आरटीआई कार्यकर्ता मौ० इखलाक को सबक सिखाने झूठे केस मे फंसाने और जान से मारने की धमकी मिली है


नागल निवासी आरटीआई कार्यकर्ता मौ० इखलाक पूर्व मे इनकी अपील पर कार्यवाही करते हुए सूचना आयोग कई बार कर्मचारी अधिकारियों पर जुर्माना भी लगा चुका है ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामूहिक विवाह कार्यक्रम के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए 1 अप्रैल 2024 को जन सूचना अधिकारी खण्ड विकास अधिकारी के कार्यालय में आरटीआई आवेदन दायर किया था निर्धारित समय सीमा 30 दिनों के भीतर जानकारी प्राप्त न होने पर इखलाक ने 3 मई 2024 को पहली अपील दाखिल की मंगलवार 21 मई 2024 को बीडीओ कार्यालय मे कार्यरत किसी अधिकारी कर्मचारी ने उन्हें फोन किया और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मौ० इखलाक को सूचना लेने के लिए बीडीओ कार्यालय मे आने की चुनौती देते हुए सबक सिखाने झूठे केस मे फंसाकर गंभीर परिणाम भुगतने और यहां तक की जान से मारने की धमकी दी मामले की गंभीरता को समझते हुए मौ० इखलाक ने इस कॉल के अंतिम हिस्से को रिकार्ड कर लिया और धमकी मिलने के तुरंत बाद खण्ड विकास अधिकारी नागल को कॉल किया और मामले से अवगत कराया और थोड़ी देर बाद बीडीओ महोदय ने माना कि धमकी देने वाला व्यक्ति सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण के अधीनस्थ कर्मचारी है  सूचना उन्हीं के कार्यालय से संबंधित है जिला विकास अधिकारी महोदय से भी आरटीआई कार्यकर्ता ने कॉल कर शिकायत की है उन्होंने लिखित शिकायत मिलने पर कार्यवाही का आश्वासन दिया मौ० इखलाक ने बताया की मुझे धमकी मिली है इसका मतलब ये कुछ छुपा रहे है और सामुहिक विवाह कार्यक्रम के क्रियान्वयन आयोजन मे भ्रष्टाचार हुआ है इसका संकेत मिलता है इनका भ्रष्टाचार सामने ना आ पाए इसलिए मुझे डरा धमकाकर दबाने की कोशिश की जा रही है मौ० इखलाक ने इस धमकी की लिखित शिकायत जिला अधिकारी महोदय सहारनपुर खण्ड विकास अधिकारी महोदय थानाध्यक्ष महोदय नागल से करने की बात की उधर जब हमारे सम्वाददाता द्वारा खण्ड विकास अधिकारी से इस विषय मे पूछ तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नही दिया भारत में आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करने के लिए कई कार्यकर्ता सामने आए हैं लेकिन इनकी सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है 2005 से अब तक कई आरटीआई कार्यकर्ताओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है आंकड़ों के अनुसार 2005 से 2023 तक लगभग 100 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर हमले हुए हैं कई कार्यकर्ताओं को धमकियाँ दी गई हैं और उनके साथ बदसलूकी की गई है इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को और अधिक कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है मौ० इखलाक जैसे साहसी कार्यकर्ता समाज में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं यह जरूरी है कि उनकी आवाज को दबाने के बजाय सुना जाए और उन्हें सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाए सरकार और स्थानीय प्रशासन को तुरंत इस मामले की जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो

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