मातृशक्तियों द्वारा रविवार को हलषष्ठी का धार्मिक व्रत धार्मिक श्रद्धा और विधि विधान से मनाया गया पुत्र के दीर्घायु और स्वस्थ सुखी जीवन के लिए महिलाओं द्वारा हल छठी का व्रत रखकर तालाब पोखर के किनारे तथा निर्धारित स्थान पर महिलाओं की टोली के साथ विधि विधान से पूजा अर्चना किया गया विशेष पूजन सामग्री महुआ का पत्ता महुआ फूल दही तिन्नी का चावल कुश आदि पूजन सामग्री के साथ तालाब पोखर अथवा अन्य निर्धारित स्थान पर पूजा अर्चना की गई हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल छठी का व्रत पुत्रवती महिलाओं द्वारा रखा जाता है इसे बलदेव छठ ललही छठ रांधण छठ तिनछठी व चंदन छठ आदि नामों से भी जानते हैं मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था जिसके चलते भगवान श्रीकृष्ण के साथ बलराम जी की पूजा अर्चना की जाती है मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से संतान को लंबी आयु की प्राप्ति होती है कथा व्यास पंडित प्रेमधर तिवारी ने बताया कि हल छठी का व्रत माताएं संतान के सुखद जीवन व लंबी आयु के लिए रखती हैं मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को कष्टों से मुक्ति मिलती है इस व्रत में हल द्वारा खेत में बोया जोता हुआ अन्न या कोई फल खाने की मनाही होती है गाय के दूध दही भी नहीं खाना चाहिए सिर्फ भैंस के दूध दही घी का सेवन व्रत के दौरान महिलाएं करती हैं
हलषष्ठी पर मातृशक्तियों ने पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा कठिन व्रत
August 25, 2024
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