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व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ,सभी कमा कर खाने वालों को 135 वां अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मुबारक !

व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ,सभी कमा कर खाने वालों को 135 वां अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मुबारक देश व दुनिया में एक धर्मयुद्ध, न्याय युद्ध, आर्थिक -सामाजिक- सांस्कृतिक- राजनीतिक समता - समानता के लिए लंबा युद्ध चल रहा है।शोषण के खिलाफ इस युद्ध की घोषणा भगतसिंह भी करके गये हैं।देश में यह युद्ध किसान, मजदूर, महिला, कर्मचारी, दुकानदारी, बेरोजगारी,शिक्षा, स्वास्थ्य आदि बहुत से मोर्चों पर लडा़ जा रहा है।इसी कड़ी में सनातन भेदभाव -सनातन शोषण के खिलाफ दो मोर्चों पर यह युद्ध हरियाणा में सप्ताह भर से यमुनानगर में व उसी समय से दिल्ली में चल रहा है। राजाओं या राजदरबारियों (राजसत्ता) द्वारा जो महिला पसंद आई उसे अपने मनबहलाव की वस्तु की प्रयोग करते हुए दर्जनों -सैकड़ो ही नहीं हजारों रानियां तक होने के उदाहरण साक्ष्यों सहित मौजूद हैं।अंबा अंबिका अंबालिका व भीष्म पितामह का महाभारत का एपिसोड अभी खत्म नहीं हुआ है,यह दिल्ली में महिला कुश्ती खिलाड़ियों व राजदरबारियों/राजसत्ता के बीच आज भी जारी है।दो टीमें बंटी हुई है।एक टीम में राजसत्ता के शोषण को जायज ठहराने वाले भाजपा निजाम, कार्पोरेट,जाति धर्म के ठेकेदारों व दरबारी मिडिया व इनके द्वारा दिमागी तौर पर गुलाम बना लिया गया आम प्रजा है। दूसरी तरफ कमाकर खाने वालों, देशभक्त,शोषण विरोधी,देश के संविधान से संचालित आम नागरिकों की व्यापक एकता है। *युद्ध अभी जारी है वैज्ञानिक सापेक्षता के सिद्धांत (आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक रूप से कोई भी न्यूट्रल/निरपेक्ष/स्वतंत्र हो ही नहीं सकता) से सभी बंधे हैं।इस मजदूर दिवस पर चैक कर लें,आप किस टीम से जुड़े। इसी तरह का दूसरा युद्ध शिक्षा के लिए शंबुक वध,एकलव्य के अंगुठा काटने से, मनुस्मृति के विरोद्ध से जारी है। वर्तमान की शिक्षा नीति 2020 ,आज के दौर की मनुस्मृति के अलावा कुछ भी नहीं है।जो डण्डें के दम पर संभव नहीं होने से आज अति महंगा करके छीनी जा रही है। इसके खिलाफ यमुनानगर में अध्यापक संघ का अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन 23 अप्रैल से जारी है।जो 28 मई को जींद रैली के रास्ते शोषण के खात्में तक जारी रहेगा।इस मजदूर दिवस पर आप फिर चैक कर ले कि आप किस टीम में हैं। अगर आप शोषण के खिलाफ इस युद्ध में शामिल है,तो आज मजदूर दिवस पर होने वाले प्रोग्रामों में शिरकत कर अपने साथ व सहयोग का एलान करें।वे लोग सबसे ख़तरनाक है,जो कहने मात्र में दिखावा *दिये* के साथ होने का करते है, परन्तु कर्म में हवा के साथ होते हैं। इनसे बचकर रहें।135 वां मजदूर दिवस मांग करता है कि सड़कों की लड़ाई में शारीरिक रूप से भी शामिल हो। पढ़ें मजदूर दिवस को,मनन करे फिर अमल करें।अभी तक हमें राजदरबारो का इतिहास पढ़ाया गया है।राजा रानियों की कहानियां सुनाई गई है। जबकि धरती का कर्ता मजदूर है,आओ उसकी कहानी -उसके इतिहास को जाने। ध्यान रहे हमारे पास इस युद्ध को जितने के लिए एकमात्र हथियार हैं
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